पूजा के दौरान मंदिर के पुजारियों ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तथा उनकी पत्नी को आशीर्वाद स्वरूप माता की चुनरी भेंट की। मंदिर के गर्भगृह की परिक्रमा करने के पश्चात उन्होंने मंदिर परिसर में माता को नारियल की संकल्प बलि अर्पित की। पंचमुखी हनुमान तथा शनिदेव महाराज के मंदिर में शीश नवाने के बाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने प्राचीन सहस्र शिवलिंग महादेव का जलाभिषेक किया।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मंदिर परिसर में अवस्थित बौद्ध स्तूप का भी दर्शन पूजन करने गए। मंदिर परिसर की व्यवस्था तथा साफ सफाई को देखकर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश काफी प्रसन्न हुए। पूजा-अर्चना के पश्चात कोलकाता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने स्थानीय लोगों तथा प्रशासनिक अधिकारियों से मंदिर के ऐतिहासिकता कि जानकारी ली। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भी इटखोरी के मां भद्रकाली मंदिर की काफी चर्चा होती है। आज यहां आकर काफी शांति महसूस हुई है। माता का मंदिर कोलाहल से दूर स्थित है।
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