टैगोर कालेज से बीएड करने वाले विद्यार्थियों की फीस लौटाने की याचिका उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी है। अब छात्र-छात्राओं की मुश्किलें बढ़ गई है। भविष्य की चिंता में विद्यार्थियों ने एडमिशन ट्रांसफर के लिए देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के सामने गुहार लगाई है। मगर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अन्य कॉलेजों में प्रवेश देने से साफ मना कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि एडमिशन ट्रांसफर के लिए पहले प्रक्रिया की गई थी, लेकिन कुछ ही छात्र-छात्राओं ने कालेज का अनापत्ति प्रमाण पत्र जमा करवाया था।
दरअसल तीन साल पहले टैगोर कॉलेज से बीएड के विद्यार्थियों ने प्रबंधन के खिलाफ शिकायत की। कॉलेज में फैकल्टी नहीं होना, लाइब्रेरी की पुस्तकों का अभाव, कक्षाएं नहीं लगने जैसे आरोप विद्यार्थियों ने लगाए। एक विद्यार्थी ने प्रताड़ित करने की बात कही और जहर खा लिया। बाद में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं ने धरना और विरोध प्रदर्शन किया। विवि और उच्च शिक्षा विभाग ने जांच समिति बनाई। कई गड़बड़ियां समिति के सामने आई। स्वशासी का दर्जा भी कालेज से छिन लिया। इस बीच विभाग ने विद्यार्थियों को अन्य कालेजों में शिफ्ट करने के निर्देश दिए। सिर्फ कुछ विद्यार्थियों ने दूसरे कालेजों में प्रवेश लिया। मगर कुछ छात्रों ने फीस लौटाने को लेकर न्यायालय की शरण ली। परंतु इसे लेकर न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी। ऐसे में अब छात्र-छात्राएं फिर एक बार दूसरे कालेज में प्रवेश के लिए विश्वविद्यालय पर दबाव बना रहे हैं।
परीक्षा नियंत्रक डा. अशेष तिवारी का कहना है कि न्यायालय और उच्च शिक्षा विभाग के आदेश पर विद्यार्थियों का एडमिशन दूसरे कॉलेज में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया की गई थी। उस दौरान कॉलेज से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर विवि में जमा करने के निर्देश दिए थे। कुछ ही विद्यार्थियों ने प्रक्रिया पूरी की गई। जबकि बाकी विद्यार्थी टैगोर से पूरी फीस लौटाने की मांग कर रहे थे। प्रक्रिया पूरी नहीं करने से इन विद्यार्थियों का दूसरे कॉलेज में प्रवेश नहीं हो सका। अब ये छात्र-छात्राएं विवि में आवेदन दे रहे है, लेकिन प्रक्रिया पहले हो चुकी है।
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